तुम हो सम्पूर्ण प्रकाश ,
मैं केवल एक किरण मात्र हूँ
तुमसे हूँ हर पल जुड़ी,
तुमसे ही उन्मुक्त हूँ।
तुमसे ही सिन्दूरी गगन पर छिट्की ,
निशा की ओट में तुम में ही सुप्त हूँ
तुमसे ही हूँ प्रकट ,
तुम में ही गुप्त हूँ
हर दिशा ,हर कॅण पर बिखरी तुमसे ही,
तुम में ही लुप्त हूँ।
तुम मुझ में हो , या मैं तुम में हूँ बसी,
जैसा चाहे तुम कहो,
मैं हर कथन में तृप्त हूँ।
मैं केवल एक किरण मात्र हूँ
तुमसे हूँ हर पल जुड़ी,
तुमसे ही उन्मुक्त हूँ।
तुमसे ही सिन्दूरी गगन पर छिट्की ,
निशा की ओट में तुम में ही सुप्त हूँ
तुमसे ही हूँ प्रकट ,
तुम में ही गुप्त हूँ
हर दिशा ,हर कॅण पर बिखरी तुमसे ही,
तुम में ही लुप्त हूँ।
तुम मुझ में हो , या मैं तुम में हूँ बसी,
जैसा चाहे तुम कहो,
मैं हर कथन में तृप्त हूँ।

The beautiful relation of sun and it's rays! :-)
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