Saturday, 29 March 2014

निर्भया


नव वर्ष की इस भोर में , 

चारों ओर से से उठते ,

कोलाहल और शोर में ,

कुछ आशा ,कुछ संशय में ,

कभी साहस ,कभी भय से

विनीत विनम्र भाव से ,

तुम्हारे लिए विनती करती हूँ 

ईश्वर नवजीवन का वरदान दे ,

बन्धनों को तोड़,

उन्मुक्त रहो,

भयमुक्त रहो ,

अंधेरों से लड़ते हुए ,

आशाओं से संयुक्त रहो।

कठिनायियो से लड़ते हुए ,

तुम सदा सबला बनो ,

निर्झर नीर सी निर्मला बनो ,

और सदा निर्भया रहो।

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