Saturday, 29 March 2014

गुदगुदी

बेकार की बातों से बोझिल मन को,

आ मुक्त कर दें अभी;


ब्रेन के ब्लैक बोर्ड से,


फ़िज़ूल की जानकारियों के फोर्मुले,


आ मिटा दें सभी ;


फिर इसे खाली आकाश सा बना ,


कोई चिड़िया उड़ा दें कभी ,


बादल के एक टुकड़े में ,


बूढी नानी का चेहरा ढूँढें कभी ;


और रात को चाँद से भी ;


मामा का रिश्ता बना लें कभी .


तुम्हारे भीतर का एक छोटा सा बच्चा,


व्यस्तता का मुंह ताक-ताक कर ,


जो ऊँघने लगता है कभी - कभी ,


थोडा सा जतन कर के ,उठा दो उसे,


गुदगुदी कर के हंसा दो उसे कभी ,


तो चादर तान कर और खराटे मार कर


सोएगी नहीं ये ज़िन्दगी !!


2 comments:

  1. Lets leave the complexities of life and enjoy the world like a child ;)

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  2. Everyone is so busy in their day to day life, we forget to enjoy ourselves..

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